ख़ामोशी भी कितनी अजीब चीज़ होती है न! कभी-कभी बहुत कुछ आँखों में ठहरा रह जाता है, मगर लबों तक नहीं पहुँच पाता। कुछ बातें वक़्त रहते समझ नहीं आतीं और जब समझ आती हैं, तब शायद उन्हें सुनने वाला कोई नहीं होता।
कभी किसी की निगाहों में छिपे ख़्वाब पढ़ने की कोशिश की है? उन आँखों में एक पूरी दुनिया होती है, कुछ अनकहे सवाल, कुछ अधूरी ख़्वाहिशें और बहुत-सी झिझक।
मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उसकी वो ख़ामोशी आज भी मेरा पीछा करती है। कभी ख़्वाबों में, कभी यादों में और कभी एक अनजाने सवाल की तरह—क्या उसकी आँखें भी कुछ कहना चाहती थीं, जिसे मैं समझ नहीं पाया?
आज भी दिल उस ख़ामोशी के पीछे छिपे राज़ को जानना चाहता है।
उसी ख़ामोशी के नाम… उस पगली के नाम… उसकी उन अनकही बातों के नाम… और उन बेचैन लम्हों के नाम, जो आज भी कहीं ठहरे हुए हैं।
एक छोटी-सी नज़र, एक अधूरी समझ और कुछ अनकहे एहसासों की यह नज़्म…
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पगली लड़की
है एक पगली लड़की
जिसकी ख़ामोश निगाहें कुछ कहना चाहती हैं
हाँ शायद कुछ कहना चाहती हैं ..........
पर न जाने वो क्यों घबराती हैं
हर सपने को आँखों में ही रख के रह जाती हैं
हाँ .... शायद वो कुछ कहना चाहती हैं ...........
देखो गौर से ....
उन नीली झिलमिलाती आँखों को .............
उन ख़ामोश आँखों में वो एक जहाँ बसाना चाहती हैं
हाँ ..... शायद वो कुछ कहना चाहती हैं ..........
ये दुनिया ही तो हैं जिनसे वो आँखें
घबराती हैं, शर्माती हैं
कहीं वो सपना टूट न जाये
इस लिए वो पगली लड़की
उन सपनों को आँखों में ही रख के रह जाती हैं
हाँ शायद वो कुछ कहना चाहती हैं
“शायद कोई समझे उसकी ख़ामोशी,
शायद कोई पढ़ ले उसकी निगाहें,
शायद कोई सुन पाए वो बातें,
जो कभी लबों तक आ ही न सकीं…”
लम्हे – The Moments
— हेमंत भटनागर
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